( श्याम चौरसिया)
कुलपति, राजदूत से लेकर 10 साल तक उपराष्टपति रह कर भारत को चौतरफा चूसने,चाटने,लूटने वाले हामिद अंसारी फर्जी आतंकी मुकदमे के आरोपी, सजा याप्ता कर्नल पुरोहित से भी गए गुजरे साबित हुए। फर्जी आतंकी आरोप में सजा भोग चुके कर्नल पुरोहित ने बरी होने के बाद भारत की न्याय,सामाजिक, धार्मिक व्यवस्था के पक्ष में जम कर कसीदे पढ़े। यदि कर्नल पूरोहित के मुकाबले अंसारी 05% भी कष्ट भोगले लेते। जिल्लत,तनाव, बदनामी झेल लेते तो शायद भारतीय न्याय व्यवस्था की माँ बहन करके किसी गैर सनातनी देश भाग चुके होते। मगर कर्नल पुरोहित अपने ईमान,धर्म,कर्म पर अडिग,अटल,अचल रहे। और करते रहे मा भारत की मंगल वंदना। जबकि हामिद अंसारी के मुकाबले कर्नल पुरोहित को भारत ने न तो सम्मान दिया। न गौरव । न पीढ़ियों को स्वर्ग भोगने के राज पथ।
जबकि हामिद अंसारी ने भारत को हर स्तर पर भोगा। जिमा।डकारा। इसके बाबजूद जेहन में लबालब भरी कट्टरता, जिहादी पन की मगरी पर बैठ भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने के कारनामे अंजाम देकर अपनी कोम के आचरण,चरित्र को संदिग्ध बना रहे है। अंसारी के कारनामो से सुरक्षा संस्थानों, तकनीकी संस्थानों, रेलवे,शिक्षा,चिकित्सा संस्थानों में सेवारत विभूतियों का जनाजा निकालने की नींव पुख्ता कर रहे है। जब अंसारी जैसा चरित्र भारत को गलियां सकता है । तब बाकी क्यो नही? वे भी अंसारी की राह पर चल भारत के लिए संकट पैदा कर सकते है। वे कोई अलग से तो आए नही। है तो वे अंसारी जैसों के रक्त बीज।
हालांकि अपवाद भी मिलते है। जैसे सोफिया कुरेसी जी। कुरेसी जी अंसारी नही हो सकती। वे भारत के लिए जीती है। उनकी हर सांस में भारत है।
अंसारी कभी सोफिया कुरेशी न होने के सबूत अपनी कट्टरता, जिहादी पन से लगातार देते आ रहे है। जाहिर अंसारी में भारत के प्रति लेस मात्र भक्ति नही है। न राष्ट्रगान न राष्ट्र गीत के प्रतिआस्था।
हैरत तो ये है कि सनातनियो पर बात बे बात भड़कने वाले ओवेशी हामिद अंसारी की कट्टरता,जिहादी पन के खिलाफ एक शब्द नही बोले। मतलब साफ है। ओवेशी हामिद अंसारी के राष्ट्र विरोधी आचरण से सहमत है। यदि न होते तो कुछ तो प्रतिक्रिया देते।
वे इससे भी सहमत लगते है कि भारत का राजदूत रहते विदेशों में सेवारत भारत की खुफिया एजेंसी रॉ के जासूसों की गोपनीयता भंग करके उनकी हत्या करवा करवा कर भारत के विरोध में पुण्य कर्म किया।
अंसारी पर उपराष्टपति रहते हुए भी विदेशी/पाक की पालकी ढोने के आरोप भी लगते रहे है।
जाहिर अंसारी की राष्ट्रीय निष्ठा,धर्म,कर्म,नीति,नीयत संधिग्ध रही है। और अब उसका विस्फ़ोट हो रहा है।
मदनी ओर अंसारी के सुर एक जैसे ही निकल रहे है। यानी टूलकिट काम कर रहा है। ताकि भारत को अस्थिर किया जा सके। अराजकता फैलाई जा सके।
अंसारी के कारनामो से आतंकी,अराजक गति विधियों में लिप्त ताकतों को खाद बीज मिल रहा है।ब
