(श्याम चौरसिया )
कर्नाटक के लोकप्रिय cm dk शिव कुमार जैसे कद्दावर सूबेदार की कालर खींचने के विवाद को लेकर bjp हमलावर है। शिवकुमार के स्वाभिमानी समर्थकों में आक्रोश है। इस घटना को एक जिम्मेदार सवैधानिक पद पर आसीन श्रीमंत का सार्वजनिक घोर अपमान बताया जा रहा है। घटना को तूल देने से बचने के लिए शिवकुमार ने भीड़ से अपनी सुरक्षा के लिए युवराज द्वारा किए गया प्रयास बताया।
मगर पहली नजर में युवराज की फेस रीडिंग और समर्थकों को कभी कोनी मारने, धक्का देने के चलते उत्साहित सिलसिले से हल्के गुस्से, घमंड,अहंकार से कालर खेचना ही लगता है। शिवकुमार भी ये महसूस करते होंगे। मगर सूबेदारी बचाने के लोभ में स्वाभिमान को ताक में रख घटना को युवराज की मेहरबानी बताना शिवकुमार की मजबूरी लगता है।
वैसे भी शिवकुमार की सूबेदारी तलवार की धार पर चल रही है। पूर्व cm सिद्धिरामय्या बत्ती देने का कोई मौका नही चूकते। ed के छापो में बरामद सबूतों के बूते एक मंत्री को त्याग पत्र देना पड़ा। फिर भी ed के छापो का सिलसिला थम नही रहा है। बताते है। छापो की तह में पूर्व cm का हाथ बताया जाता है। आंख घर के चिराग से फूटने का अंदेशा cm शिवकुमार जता चुके है।
भले ही शिवकुमार ने अपनी नाक बचाने के लिए युवराज का आशीर्वाद बता दिया हो।मगर एक जिम्मेदार cm होने के नाते असम के हेमंता विश्व शर्मा ने cm शिवकुमार के समर्थन में मोर्चा खोल युवराज को आड़े हाथ लिया। शर्मा का मानना है कि cm शिवकुमार जिम्मेदार सवैधानिक पद पर आसीन है। पद की लोकतांत्रिक मर्यादा है। मूल्य है। सवैधानिक पद पर आसीन cm के साथ युवराज ने सार्वजनिक रूप से अमर्यादित अभद्रता अंजाम देकर निम्न स्तरीय मानसिकता ओर हलकट संस्कारो का परिचय दिया है। शर्मा ने 2015 में अपने साथ घटी अशोभनीय, शर्मनाक घटना का जिक्र करते हुए कहाकि युवराज अपने अधिनस्तो को पैर की जूतियां समझ व्यवहार करते है। अधिनस्तो के लिए युवराज के मन मे न कोई आदर है। न सम्मान। न सहयोग।
यदि में 12015 में मेरे साथ घटी घटना को स्वाभिमान ताक में रख पचा जाता तो शायद आज भारत मे मेरी सम्मानित पहचान न होती। न विश्वास,न आदर, न सम्मान, प्यार मिलता। योग्यता, प्रभाव, लोकप्रियता,जनाधार का दमन, शोषण करना खानदान धर्म मानता है। युवराज की हरकतों,बचकाने कारनामो से दम घुटता है। नतीजन मेरे जैसे अनेक श्रीमंतों ने युवराज की खानदान जनित अभद्रता को बर्दास्त करने की बजाय कांग्रेस से विदा लेना हितकर माना। उनमें से ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे अनेक श्रीमंत आज शिखर पर है।
सनद रहे। शिवकुमार के साथ घटी घटना को भीड़ तंत्र की परिस्थिति जन्य घटना मान अनदेखी भी कर दिया जाए। लेकिन कांग्रेस के बहुत प्रभावशाली रहे बिहारी नेता कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम केशरी, पूर्व pm pv नरसिंहाराव, अनिल शर्मा, up की तत्कालीन अध्यक्ष बहुगुणा, हिमाचल के पूर्व cm, जैसे दर्जनों प्रभाव शाली, लोकप्रिय,व्यापक जनाधार वाले श्रीमंतों के साथ घटी अभद्र घटनाओ को अनदेखी करना प्रजातंत्र के साथ मजाक होगा।
इस तरह की हलकट,शर्मनाक घटनाएं कंग्रेसी युवराज के अलावा बीजेपी,सपा, शिवसेना उद्धव, एनसीपी सहित अन्य दलों के सदर अंजाम क्यो नही देते? वे क्यो अपने छोटे से लेकर बड़े समर्थक/ कार्यकर्ता को सीने से चिपका कर रखते है।
सनद रहे। सुप्रीम मार्च ओर राष्ट्रपति से मिलने जाते समय युवराज पर cm शिवकुमार से ही नही अनेक प्रभावशाली समर्थकों के साथ शर्मनाक अभद्रता करने के आरोप लग रहे है। इस तरह के vdo वायरल भी हो रहे है। युवराज ओर एक महिला पुलिस अधिकारी के साथ अशोभनीय हरकत का vdo भी सुर्खियों में है। पत्रकारों के पूछे जाने पर उत्तर देने की बजाय युवराज उखड़ पत्रकार पर ही बरस पड़े थे।
इन्ही आक्रमक शर्मनाक घटनाओ की प्रतिक्रिया स्वरूप जनता कांग्रेस को खारिज कर वोट नही देती। अपने कारनामो पर पर्दा डालने और करारी हार की हताशा, कुंठा,हीनता से उभरने के लिए युवराज वोट चोरी का फिजूल,बेमतलब हंगामा करके अराजकता फैलाते लगते है। सवैधानिक संस्थाओं पर फिजूल के आरोप जड़ते है।भारत सब देख, तोल, नाप रहा है।
