
(श्याम चौरसिया )
शारदेय नवरात्री से भारत विभिन्न धार्मिक,सामाजिक उत्सवों की बयार में बहने, थिरकने,झूमने लगता है। नवरात्री में 09 दिन माता रानी की आराधना,साधना में हर व्यक्ति रम जाता है। विभिन्न अनुष्ठान,पूजा,व्रत। इन नो दिनों में कुछ लोग सिद्धि पाने के लिए औघड़ साधना के लिए श्मशान में जा डटते। ये भिन्न प्रकार की साधना होती है। साधु- सन्तो के लिए नवरात्री जन कल्याण के लिए अवसर होता है। वे भी तन मन की शुद्धि के लिए तपस्या करते है।
बंगाल,आसाम, त्रिपुरा, मेघालय में तो नवरात्री पर माता रानी के विभिन्न रूपों से सजे विशाल पंडालों के दर्शनों के लिए देश, विदेश के लोग उमड़ते ही है। भारत के हर हिस्से को माता रानी का इंद्र धनुषी रंग चढ़ जाता है।
बंगला देश मे भले ही सनातनी अल्पसंख्यक हो। उन पर जिहादियों के जानलेवा हमले होते हो। धर्म स्थलों को फूंकने,तोड़ने की घटनाएं घटती हो। इसके बाबजूद सनातनी हर खतरे को उठा अपनी परंपरा को जीते हुए पंडाल सजाते है। उनका साहस अभिनंदनीय है।
गुजरात, महाराष्ट्र, मप्र, राजस्थान, कर्नाटक, गोवा आदि गरबा की आतिसी लय ताल में आकंठ डूब जाता है।मूर्ति पूजा का घोर विरोध करने वाले, होली के रंग लग जाने पर सर तन से जुदा करने वाले गैर सनातनी गरबा में शामिल होने के लिए थोथे तर्को के बूते स्तरहीन विवादों को तूल देते है। भाई। गरबा में शामिल होना हो तो जरा अपने घर की महिलाओं को भी माता रानी की अर्चना में योग देने दो। बस यहाँ गैर सनातनी बिदक लोकतंत्र,संविधान की दुहाई देने में अलख फाडने लगते है।
इसी काल मे संत झलेलाल, अग्रसेन जी के पर्व भी आते है।
नवरात्री के बाद दशहरा, और फिर भारत की आर्थिक रीड का महा पर्व दीपावली के दीपो में भारत रोशन हो उठता है। इस पर्व को मनाने के लिए घरों की साफ सफाई, रंग रोगन, लिपाई पुताई कराई जाती है। महिलाओं का काम बढ़ जाता है।
इन्ही पर्व काल मे खरीब फसलों की मंडी या भंडारण ओर रवी फसलों की बुवाई के लिए किसान खेत तैयार करते है। अच्छे बीजो से बोबनी, सिंचाई करते है।
बिजली की खपत में गुणात्मक बढ़ोतरी होने से किसानों को दिक़्क़तों का सामना करना पड़ता है। समझदार किसानों ने बिजली संकट से बचने के लिए सोर पैनल लगवा लिए है।
किसानों,पशु पालकों के लिए दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा होती है। पशु धन को सजा उनकी पूजा की जाती है।
दीपावली के 11 वे दिन देव उठावनी एकादशी अनुष्ठान संपन्न होता है। इस पर्व के बाद विवाह जैसे अन्य मांगलिक कामो का श्री गणेश हो जाता है। नवरात्री के बाद शरद पूर्णिमा पर मंदिरों में खीर के रूप में अमृत प्रसाद दिया जाता है। देवालय सजाए जाते है। शरद पूर्णिमा के चौथे दिन करवा चौथ पर महिलाएं पति की दीर्धायु के लिए कठोर तप व्रत करती है।
यदि पर्व न हो तो हम ज्योत से ज्योत ही न जलाए। न रिश्ते निभाए। न व्यापार में आने वाली कटुता दूर करे। हर पर्व हमे आनंद से जीना सिखाता है। पर्व प्राण है।
