
( श्याम चौरसिया)
बिहार-पटना के कांग्रेस के सीनियर लीडर संतोष कुमार को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष खरगे के सुर में सुर मिलाने की कीमत बुरी तरह कुटाई के रूप में चुकानी पड़ी। संतोष कुमार की बात पूरी सुने बिना खरगे बुरी तरह उबल पड़े। और सारी सवैधानिक,राष्ट्रीय मर्यादा, आदर्श, मूल्यों को ताक में रख खरगे ने pm मोदी के स्वर्गीय पिता के पिता के सम्मान का जनाजा निकाल कांग्रेस की बची खुची विश्वसनीयता, प्रभाव,जनाधार का बंटाधार कर डाला।
Bjp ने खरगे और कांग्रेस के खिलाफ राष्ट्र व्यापी मोर्चा खोल कांग्रेस कार्यालयों के सामने विरोध स्वरूप पुतले फूंक डाले। सिलसिला बदस्तूर जारी है।
भारतीय राजनीति में बलात सत्ता हथियाने या पाने के लिए इतनी भीषण गिरावट पहली बार देखने को मिली। कांग्रेस,नेहरू,इंद्रा के घोर विरोधी रहे राम मनोहर लोहिया, जेपी, लाडली मोहन निगम, डॉक्टर महावीर प्रसाद, डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुकर्जी, दीनदयाल उपाध्याय, अटलजी,आडवाणी जी आदि ने कभी नेहरू,इंद्रा जी, राजीव जी, नरसिंहाराव जी आदि के खिलाफ व्यक्तिगत ,पारिवारिक हमले नही किए। विरोध किया। सत्ता की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ। जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जन जागरण के लिए आंदोलन किए। प्रदर्शन किए। जेल जाकर यातना भी झेली। 19 महीने के आपातकाल की अमानवीय, अप्रजातांत्रिक यातना भोगने के बाबजूद लाखो भुगतभोगियो में से एक ने भी व्यक्त्तिगत हमले नही किए। और तो और 1967 में संसद के सामने प्रदर्शनरत निर्दोष साधुओं सन्यासियों को भून देने के बाद भी pm इंद्रा जी के खिलाफ किसी ने व्यक्तिगत हमले नही किए। न हमले किए और न विरोध किया। जबकि इंद्रा जी के खास माने जाने वाले मथाई ने अनेक राहस्योघाटन किए थे। सत्ता के दुशासन, दुराग्रह, अत्याचार,अनीति,अन्याय का का प्रतिकार लोकतांत्रिक तरीके से किया।
उस काल के विपक्ष ने हताश,कुंठित होकर कांग्रेस सरकार को उखाड़ने के लिए हिंसा, अराजकता का सहारा नही लिया। न विदेशियों, दुश्मन देशों से कांग्रेसी मणिशंकर अय्यर की तर्ज परपाकिस्तान से मदद मांगी। न सत्ता हथियाने के लिए कांग्रेस-विपक्षी दलों की तरह चुनाव आयोग, न्याय पालिका आदि सवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ स्तरहीन, अमर्यादित जहर उगला।नफरत फेलाई। समाज को जातियों में बांटने का पाप किया।
2014 के पूर्व के विपक्ष ने प्रजातांत्रिक तरीके से विरोध वाणी को मुखर किया।जन जागरण के लिए धैर्य,संयम के साथ लंबी पारिया खेली।
कांग्रेस नीत विपक्ष की तरह सत्ता हथियाने के लिए अराजकता,हिंसा नही फेलाई। आतंकी शारजील इमाम,अफजल गुरु,कसाब का महिमा मंडल नही किया। आतंकियों को आतंकी ही बता भारत की आंखे खोली। जिसका नतीजा जनता ने कांग्रेस को सत्ता से उखाड़ फेंका। ऐसा फेका की आज कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए मर्यादा,मूल्य, आदर्श की बलि चढ़ा pm मोदी को सत्ता से बेदखल करने के लिए बंग्लादेश,नेपाल, की तरह उत्पात मचाने की मंशा रखते है। भारत को फ्रांस,जर्मनी, इटली की तरह जलाना चाहते है। भारत की एकता, अखंडता में बत्ती देने से भी गुरेज नही दिखा रहे है।
शायद इसी नापाक इरादे को पटना में खरगे ने प्रकट करके अमर्यादित, असवैधानिक, अप्रजातांत्रिक जहर उगल आफत मोल ले ली। मंसूबे जाहिर कर दिए। खरगे,कांग्रेस के खिलाफ बीजेपी हमलावॉर है।
कांग्रेस नीत इंडी गठबंधन खरगे के बचाव में कसरत कर रहा है तो बसपा की मायावती, शिवसेना,एनसीपी, ओवेशी आदि ने कंग्रेस, खरगे को आड़े हाथ ले जम कर धुलाई कर दी।
सबसे दिलचस्प। अभिव्यक्ति की आजादी की पुरजोर वकालत, पैरवी करने वाली कांग्रेस ने अपने ही सीनियर लीडर संतोष कुमार को कूट असली चेहरा भारत को बता दिया। साफ। कांग्रेस में लोकतंत्र होता तो संतोष कुमार की बर्बरता और तानाशाही तरीके से कुटाई नही होती।
कांग्रेस वैसे ही समर्पित, निष्ठावान कार्यकर्ताओ का भीषण अकाल झेल रही है। ऊपर से अपने ही समर्पित नेताओ को हर स्तर पर अपमानित करके जड़ें कटवा रही है। और फिर युवराज की सदारत में वोट चोरी के लिए अलख फाड़ते है। बीजेपी के वोट कंग्रेसी अपनी नजायज करतुतो,कारनामो से खुद बढ़ा देते है। राजा दिग्गी पिछले 10 साल से कांग्रेस कुनबे को फूल छाप कांग्रेसियो से सचेत रहने की नसियत देने के बाबजूद भोपाल,और अपनी ही कर्मभूमि राजगढ़ से लाखों वोटो से हार चुके है। कांग्रेस जमीनी नही बल्कि पैराशूट है। यदि जमीनी होती तो युवराज विदेश भाग मौज करने की बजाय पंजाब में अमित शाह की तरह डेरा डाल कांग्रेस की नींव पुख्ता करते।
