( श्याम चौरसिया )
सितारे खेरासिलाल जैसी विराट हस्ती को एक अनजान 35 साला युवती छोटी बाई ने अपनत्व, मेल मुलाकात के बूते बड़ा कारनामा अंजाम दे,लालू पुत्र तेजस्वी यादव सहित अनेक राजनेतिक पंडितों के होश उड़ा दिए। शर्म ओर कुंठा से खेरसी लाल मुह छुपाए फ़िर रहे है। उनसे जनाब देते नही बन रहा है। अलीनगर से महागठबंधन नेता बाहुबली विनोद मिश्रा की तुलना में खेरासिलाल निसंदेह 21 थे। मगर मिश्रा को धूल चाटने वालो बीजेपी उम्मीदवार 25 साला लोक गायिका मैथली ठाकुर की जीत की चर्चा से सोशल मीडिया भरा पड़ा है।
छोटी बाई के बड़े कारनामे का छोटा सा जिक्र तक न होना बेइंसाफी है। जबकी असल हकदार छोटी बाई ही है। छोटी बाई की यरह मैथली भी किसी राजनीतिक घराने से नही आई थी। पहली बार दोनों को बीजेपी ने महाबलियों से मुकाबला करने बिना किसी साधन के चुनावी अखाड़े मे झोंका था। बीजेपी ने जीत की उम्मीद में दाव नही लगाया था। सही तो ये है कि बीजेपी के पास खेरासिलाल जैसी हस्ती के तोड़ का कोई उम्मीदवार ही नही था। बड़ी मुश्किल से छोटी बाई राजी हुई।
ग्रहस्थ ओर बहुत साधारण छोटी बाई भाषण देना नही जानती थी। सवांद के लिए शब्दों का अभाव।पारिवारिक शालीनता,मर्यादा उसमें कूट कूट कर भरी थी। खेससिलाल के प्रचुर वैभव के आगे बेहद बोनी।
मतदाताओं ने खेरासिलाल के विराट वैभव को नकार छोटी बाई की मर्यादित शालीनता को गले लगाने में देर नही की। छोटी बाई मतदाताओं के बीच की थी। छोटी बाई से बडे सा दुख दर्द बयान करना आसान था। पैदल घूमने वाली ओर साधरण से घर मे रहने वाली छोटी बाई को चाहे जब घेरा जा सकता था। ओर खेरासिलाल? जीत कर बैठ उड़न खटोले मे रफू हो जाते। खेरासिलाल के महल में घुसना आसान नही था। खेरासिलाल का नक्कारखना बडा था। कोन सुनता? नतीजन मतदाताओ ने खेरासिलाल के वेंभव को खारिज करके तेजस्वी यादव को झटका फ़िया। ओर बीजेपी की छोटी बाई पर विश्वास जताया
मतदाताओं ने छोटी बाई को नाम
के अनुसार छोटा नही रहने दिया। बड़ा बना दिया। दिखादी लोकतंत्र की ताकत। लोकतंत्र का मखोल उड़ाने वाले महेरासिलाल को दे दी विदाई
सब तो ये है। प्रखर राष्ट्रवाद के पुरोधा pm मोदी- नीतीश की सुनामी में तिनके भो तर गए।
