(श्याम चौरसिया )
आईएएस जेसे बौद्धिक,कर्मशील मर्यादित,आदर्श पद पर पदस्थ सन्तोध वर्मा संतोष रखने की बजाय बतौर अजाक्स अध्यक्ष द्विज समाज के खिलाफ जहर उगल जिंदगी भर की कुंठा, हीनता उगल बैठे। इस भेदभाव, पक्षपात भरे जहर से बेपटरी, अमर्यादित हो चुके वर्मा को पटरी पर आने में देर नही लगी। वर्मा के हाथ द्विज समाज के हवन में ऐसे जले कि प्रदेश , राजधानी, घर और उनके गांव तक मे चिंगारी फेल गयी।रिश्तेदार दो खेमे में बट वर्मा को कोसने लगे।। वर्मा के ज्यादातर रिश्तेदार उच्च पदस्त है। वे द्विज समाज के बीच संकून, बिना किसी भेदभाव के रहते है। एक दूसरे के मांगलिक प्रसंगों में भागीदारी निभाते है।सब एक दूसरे पर निर्भर है। लेकिन वर्मा जातिय, सामाजिक जाजम पर बैठने की बजाय उनसे बॉस की तरह बर्ताव करते रहे है। समरस होने के समय लगा देते है।
बतौर अजाक्स प्रदेश अध्यक्ष वर्मा अपने काले अतीत को धोने का प्रयास करते दिखते है। लसतना, रीवा, पन्ना में पदस्थी के दौरान दिए झांसे के खिलाफ एक पीड़ित महिला ने इंदौर के एक थाने में धोखाधड़ी, योन शोषण, प्रताड़ना की रिपोर्ट दर्ज करवा कर केरियर को दागी बना दिया लथा । सयोग से महिला द्विज समाज की थी। बताते है। महिला से किए बर्ताव की प्रतिक्रिया परिवार,समाज मे बहुत तीखी,अप्रिय हुई थी। ये घाव भर पाता उसके पूर्व ही जाली दस्तावेज बनवा उच्च सेवा का रास्ता साफ करने के कांड में फस गए। नोकरी तक दाव पर लग गयी। वर्मा जैसे तैसे नोकरी बचाने में तो कामयाब रहे।
लवर्मा के खिलाफ द्विज समाज के अलावा अन्य समाजो ने प्रदेश व्यापी पर्दशन किए। मार्च निकाला। महिलाओं ने विरोध दर्ज कराया। थाने घेर वर्मा को सेवा से बेदखल करने की मांग की। जिस अधिकारी के मन मस्तिक में इतनी गंदगी भरी हो वो उच्च प्रशानिक सेवा के योग्य नही माना जा सकता है। हाल में कॉर्ड ने पक्षपात पूर्ण रवैये के आरोप में एक सैन्य अधिकारी की बर्खास्ती पर मोहर लगा लोकतंत्र को बल दिया है।
वर्मा की गंदगी के खिलाफत ओर समाज की समरसता, मर्यादा, स्वच्छता के पक्ष में बीजेपी, कांग्रेस, अन्य राजनीतिक दल भी उतर आए। प्रतिपक्षी नेता उमंग सिगार ने तो वर्मा पर जबरजस्त हमला बोला। सिंगार ओर वर्मा एक ही समाज और पड़ोसी जिले से आते है। सिंगार, वर्मा के अतीत, व्यक्तित्व, कृतित्व, रवैये, से भलीभाती परिचित बताए जाते है। वे वर्मा का समर्थन करके द्विज समाज को नाराज करके अपनी राजनीतिक जमीन,विरासत को खोना नही चाहगे। धार में सिंगार का बंगला भी द्विज समाज के बीच ही रहा है।
चौतरफा विरोध के घबराकर वर्मा ने द्विज समाज,अन्य समाज से माफी मांग अपने को किसी हद तक भले ही फिलहाल सुरक्षित कर लिया हो। गगर अजाक्स के अलावा स्पाक्स में भी संदिग्ध हो चले। सपाक्स पहले ही भाव नही देती थी। इस जहर भरी हरकत की प्रतिक्रिया से वर्मा की सेवा, व्यवहार,आचरण बुरी तरह प्रभावित होने से इंकार नही किया जा सकता। समाज और सरकार सब देखती है।
प्रसंगवश। यदि वर्मा की संताने इनके ही समाज के सैकड़ो अधिकारियों, कर्मचारियोंओर उनकी सन्तानों की तरह योग्य,कुशल, पारंगत होती तो वर्मा को जहर वमन की नोबत नही आती।⊄
