(श्याम चौरसिया )
Cm डॉक्टर मोहन यादव ने ब्यावरा- सुठालिया नगरीय निकतयो को आर्थिक तंगी से उभारने ओर बकाया वेतन भुगतान के लिए 10 -10 करोड़ का शंख फूंका। 33 करोड की मोहनपुरा पेयजल सिंचाई परियोजना को मंजूरी दे बड़ी राहत दी।
10-10 करोड़ की बम्पर राशि से नगरीय विकास योजनाओं को भले ही युक्तियुक्त, व्यवहारिक को पंख न लगे।
मगर 8-10 महीनों से बकाया पगार को प्राप्त हेतुपिछले दिनों सफाई,पेयजल जैसी अन्य मूलभूत सुविधाओ को ठप्प कर हड़ताल पर जा चुके थे। नगर पालिका ब्यावरा कर्मी दीपवाली मनाने के लिए 02 माह का वेतन मिले बिना टस से मस नही हुए। यदि cmo इकरार अहमद खुद की साख दाव पर लगा कर इकरार करार नही करते तो cm यादव के आगवन के दिन धन तेरस तक नगर का हर चौराहा- गलियां निस्तारी कचरे से पट बदबू मारने लगता
कमोवेश यही दशा सुठालिया नगर पंचायत की लगती है। सुठालिया में आक्रोश सड़क आने की नोबत नही आई।सुठालिया उभरता हुआ विकासील कस्बा है। यहाँ ब्यावरा की तुलना की तुलना में निर्माण कार्यो की गुणवत्ता कुछ अच्छी पाई गई। इस उपलब्धि का श्रेय तत्कालीन अध्यक्ष राकेश शिवहरे, मोहन लोधी को जाता है।
ब्यावरा के 27 से अधिक सफाई कमियों को जब तक कर्मोंन्नति का लाभ नही मिला जब तक उन्होंने 1.35 लाख की चढ़ोत्तरी अर्पित नही कर दी। आम धारणा है कि नगरीय निकाय में आम जनता के दूर खुद नप कॉपियों के वेतन, दिहाड़ी,मासिक आदि सेवाओं जैसे अन्य काम नैवैद्य अर्पित किए बिना संभव नही है।
ब्यावरा जैसी नगरीय निकाय का 05.05 करोड़ के लगभग जल कर, संपति कर और पालिका की दुकानों का बकाया पिछले कई सालों से बदस्तूर चला आ रहा है। यही गत सुठालिया नप की है। बकाया वसूली टेड़ी खीर लगती है।
नप कर्मियों की माने तो कथित नेता रोड़े न बने तो सख्ती से वसूली होने में देर न लगे।
सवाल ये उठता है जब निर्धारित बजट राशि मे हरदा,बरेली, शुजालपुर इटारसी, जैसी सैकड़ो नगरीय निकाय में टनाटन गुणवत्ता के निर्माण कार्य सम्भव है तो राजगढ़ की तमाम नगरीय निकाय को कौन सा राहू- केतु डस लेता है? जहां सड़क तो छोड़ो नाली जैसे काम तक साल भर भी टिक नही पाते।टे बोल चुगली करने लगते है।
पेयजल के लिए अभिशप्त 55 हजारी ब्यावरा के कंठ तर करने के लिए cm यादव ने 33 करोड़ की लागत से नई मोहन पूरा पेयजल योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के टेंडर लग चुके है। cmo इकरार अहमद के अनुसार अप्रैल 27 तक नगर के 60% से अधिक हिस्से के कंठ ये महती योजना पूरी कर देगी।
अभी ब्यावरा को पिछले 20 सालों की तरह 04-05 वे दिन आधे घँटे के लिए कुशलपुरा बांध, घोड़ा पछाड़ नदी से सप्लाई जारी है। अनेक बस्तियों में 08 दिनों के अंतराल से नल चलते है। मोहल्ले मोहल्ले लगे ट्यूबवेल से जारी सामूहिक सप्लाई पानी की तंगी का अहसास नही होने देते। जल स्तर ऊपर उठने से नलकूप ठीक चलने लगे।
