- (जगदीश रघुवंशी)
सतातन का महान वार्षिक उत्सव दीपावली यज्ञ को पूर्ण विधि विधान से सम्पन्न कराने के लिए बच्चे तक कर्म आहुति अर्पित करके अपने परिवार की कुबेर साधना को परवान चढ़ा रहे है। बह्म मुहर्त में नहा धो कर किराना, फाटकों, दिया, लक्ष्मी पाने- धार्मिक कैलेंडरों, मेहंदी,रंगोली, गेरू, पुताई रंगों, पशु श्रंगार, रोली, पुष्पों, मौसमी फलों, कृषि यंत्रों आदि की दुकानें सजाने में लिप्त हो जाते है। चिंता,जनून उनमें कूट कूट कर देखा जा सकता है।
यदि बाल श्रम हिस्सेदारी न निभाए तो दीपावली उत्सव का उत्साह परवान ही न चढ़ पाए। बाल हठ को पूरी करने के लिए मा बाप खुशी खुशी पूजन सामग्री, फाटकों पर हजारों रुपये कुर्बान कर देते है। उद्देश्य दीपावली की रंगीनी किसी भी स्तर पर कम न हो।अंधेरी रात अतिशबाजी के तेवरों से जुगनू की तरह दमकती,चमकती, सजती, जमती रहे।
बाल श्रम लाखो करोड़ की खरीद फरोख्त का मौन गवाह भी है।
