
( श्याम चोरसिया )
मध्यभारत के सबसे जागरुक, बीजेपी का असीरगढ़ माने जाने वाले और सबसे दमदार केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के लोकसभा क्षेत्र गुना की नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती सविता गुप्ता को अन्य स्थानीय निकायों की तरह पाषर्दों के चेहतों को न नवाज आउट सोर्स कर्मचारियों को रखने की सजा तगड़े विरोध, आरोप- प्रत्यारोप के रूप में भोगनी पड़ रही है। कुछ अन्य आर्थिक अनियमिताओं के आरोप भी जड़े है। विरोध का परचम थामने वाले कांग्रेसी नही बल्कि उनके अपने दल बीजेपी के ही उपाध्यक्ष और कुछ पार्षद है।
उपाध्यक्ष और कुछ पार्षदों ने अध्यक्ष श्रीमती गुप्ता पर गंभीर आरोप जड़े है। कलेक्टर ओर बीजेपी आला कमान से शिकायतें करके जांच की मांग की है। वे अध्यक्ष को बेदखल करने पर उतारू लगते है।
बीजेपी आला कमान शिवपुरी की तरह ढील दिए हुए है। इससे शिकायत कर्ताओं के मंसूबो पर फिलहाल पानी फिरता दिख रहा है।
सनद रहे। गुना में 5 से 8 दशक के दौरान बीजेपी का झंडा उठाने वालों में श्रीमती गुप्ता का परिवार भी एक था। श्रीमती गुप्ता हर तरह से सक्षम,समर्थ है। इनका ये उजला पक्ष शिकायतकर्ताओं की फास है। ये शिकायतकर्ता भी जानते है।
इस रस्साकसी में नप मौलिक कर्तव्य,दायित्व भी ठीक से निभा नही पा रही है।
केंद्रीय मंत्री श्री सिंधिया भी शिकायतों को ज्यादा गंभीरता से नही लेते दिखते है। शायद श्री सिंधिया बीजेपी आला कमान का मूड भाप गए।
नप निजाम विकट प्रशासनिक, राजनीतिक दौर से गुजर रहा है। सबसे दिलचस्प ये है कि शिकायतकर्ताओं का असर आम जनता पर कम पड़ रहा है।ये श्रीमती गुप्ता के लिए शुभ संकेत माना जा सकता है।
जनाधार, विश्वसनीयता खो चुकी कांग्रेस दाल गलाने की जी तोड़ कोशिश कर रही है। एक पूर्व मंत्री सुराखों को नाप-तोल भी रहे है। पर वजन के अभाव में हनुमान चौक भी पार नही कर पा रही है। कांग्रेस को ये डंबका है कि ढील देते ही शिकायतकर्ता अगूंठा न दिखा दे। बात दल निष्ठा से जुड़ी है।
