
( श्याम चौरसिया)
भारत के विभिन्न सूबो,खासकर गुजरात, आंध्र,तेलंगाना,कर्नाटक के निर्माण,रचना में योग देने वाले लाखो आदिवासी वतन अलीराजपुर, बड़वानी,धार,रतलाम राजस्थान के भीलवाड़ा, बांसवाड़ा लौटने लगे। सबसे ज्यादा वनवासी गुजरात,महाराष्ट्र,मप्र की विभिन्न सरकारी,गैर सरकारी परियोजनाओं के निर्माण में योग देते है। उनके लिए निर्माण एक यज्ञ से कम नही है। इंदौर,रतलाम,चित्तौड़, उदयपुर,बड़ोदा,अहमदाबाद का भवन निर्माण व्यवसाय इनके कंधो पर ही टिका है।
वसन्त में लौटने की वजह भी है। इनका दीपावली से भी बड़ा पर्व भगौरिया। होली के लगभग एक सप्ताह पूर्व वनांचल भगोरिया की मस्ती,उमंग,तरंग,उल्लास में डूब जाता है।
सांस्कृतिक पर्व की खुमारी होली के बाद उतार पर आ जाती है।
इन जिलों के विभिन्न कस्बो,नगरों में होली के 10-12 दिन पूर्व से भगौरिया के हाट सजने लगते है। हाट में हिस्सा लेने के लिए युवक युवतियां महीनों पहले से तैयारियां चालू कर देते है। मादल की थाप पर नाच गाने की रिहर्सल करते है। इसके लिए वस्त्र,मेकअप का सामान, आभूषण, सजने सवरने की अन्य वस्तुएं खरीदते है। सबसे ज्यादा वस्त्रों पर व्यय करते है।
मप्र के अलावा गुजरात,महाराष्ट्र के व्यापारी चंद दिनों में लाखो का समान बेच लेते है।
आदिवासी समाज के युवक युवती भगौरिया की हाट में उन्मुक्तता से नृत्य करते है।समाज की कुछ सामाजिक दिलचस्प मान्यताओं परम्पराओ का गवाह भी भगौरिया होता है। दिल मिलने पर युवती जिस युवक का पान का बीड़ा कबूल कर लेती है। वह उस युवक के संग प्रतिकात्मक भाग जाती है। सब परिवार की सहमति से होता है। ये स्वस्थ सामाजिक परम्परा प्रणय कबूलने की मानी जाती है।
भगौरिया का हिस्सा बनने वाली युवतियों को आधुनिकता के रंग में रंगा देखा जा सकता है। घाघरा चोली की जगह कीमती साड़ियों, अन्य आधुनिक वस्त्रों ने ले ली।कुछ युवतियां चश्मा भी लगाती है। अनेक युवतियां सुंदरता में फिल्मी अभिनेत्रियों को भी मात देती है।
इसी तरह से युवक खुद को 21 साबित करने के लिए धोती कुर्ते की जगह जीन्स डाट, मस्ती से झूमते,थिरकते मिल/ दिख जायेंगे।
मौज मस्ती का ये पर्व करीब 20 दिन का होता है। होली सम्पन्न होते ही फिर आदिवासी कर्तव्य पथ के सारथी बन जाते है।
यदि आदिवासी न हो तो रवी फसल कटाई महोत्सव महाराष्ट्र,गुजरात,मप्र,राजस्थान में सम्पन्न ही न हो।
धार,बड़वानी, अलीराजपुर के सेकड़ो आदिवासी गुजरात के जाम नगर, भाव नगर, जूनागढ़ आदि के पचासों धन्ना सेठो के मेजर,कर्नल,मैनेजर है।
भगोरिया उत्सव के बर बारीक मिजाज को सरकार/ प्रशासन भी कबूलता है। चाक चोबन्द इंतजाम। मजाल ! परिंदा भी पर मार मर्यादा दे खिलवाड़ का जोखिम उठा ले।
उत्सव में कोई भेदभाव नहीं। ऊंच नीच की दीवार नही।सब समान।
हाट उत्सव में आने से पूर्व मंदिर दर्शन परम्परा का पवित्र हिस्सा होता है।
2026 में 24 फरवरी को पहला हाट- उत्सव भगोरिया का श्री गणेश होगा। होली के बाद खुमार उतर जायेगा।
