
(श्याम चोरसिया)
90 लाख की लागत से भारतीय पुरातत्व विभाग ने प्रसिद्ध इतिहासिक नरसिंहगढ़ किले का मेकप करने की किलेबंदी की थी। ठेकेदार ने बाकायदा मचान भी तान डाले। मरम्मत में उपयोगी सामग्री का जखीरा भी लगा लिया था। निर्माण कार्य गति पकड़ पाता। उसके पूर्व ही ठेकेदार काम रोक फुर्र हो गया। ठेकेदार के कारिंदे ठीक से जबाब देने की स्थिति में नही लगते।
भारतीय पुरातत्व विभाग, भोपाल स्थित अधिकारी विजय शर्मा के मुताबिक ये चलता काम राशि के अभाव में रुकवा दिया। सवाल ये है कि जब केंद्र सरकार ने किले का मेकप कराने की मंजूरी के बाद ही विभाग नेजारी निविदा प्रक्रिया ठेकेदार महेंद्र प्रताप सिंह के नाम से स्वीकृत की थी। बिना हरीझंडी के कोई भी ठेकेदार गर्दन नही फसा सकता।
पेंच गहरा और नरसिंहगढ़ को पर्यटन नक्से में शामिल करने में अड़ंगा डालने के आदि की हरकत लगती है।
जानकारों का दावा है कि स्थानीय दबाब की वजह से पुरातत्व विभाग ने हाथ खेच लिए। हालांकि अधिकारी विजय शर्मा ने इस दावे से इंकार करते हुए कहाकि बजट आवंटन होते ही काम चालू करवा दिया जायेगा। यानी अप्रैल के बाद ही राहू की दशा से किला मुक्त हो सकता है। पर अचानक चलते काम को बेवजह ब्रेक नही लग सकता।
जानकारों का दावा है कि पुरातत्व विभाग खेल,खेल शासन को भटका रहा है।
केंद्र सरकार की मंजूरी के साथ ही पहले फेज का बजट 90 लाख रुपये आ चुके थे। इस राशि से किले की बाहरी रंगत,छटा, आभा को दर्शनीय, लुभावनी बनाना था। गहन सर्वे के बाद किले की मरम्मत के लिए करीब 05 करोड़ की जरूर आंकी गयी थी। 04 फेज में इस राशि से किले के बाहरी, अंदरूनी हिस्से को पुनः बहाल करना प्रस्तावित है।
कभी ज्योतिष विद्या का केंद्र रहे किले को लगे राहू हटने का नाम ही नही ले रहे है। किले की बिक्री में भी कुछ कथित वारिसों ने अड़ंगा डाल इसे खंडहर बनाने ने योग दिया। खजाने की तलब मे मौका परस्तो ने दीवारें, जमीन, छत तक खोद डाली।कीमती खिड़की दरवाजे निकाल डाले। स्विमनिग पुल नेस्तनाबूद कर दिया। छत ढाह दी।बदरंग कर दिया। देख रेख के अभाव में झाड़ झंडकर उग आए।इसके बाबजूद किला बुलंद,दर्शनीय, विस्मयकारी है।
हर नरसिंहगढ़ वासी को किले के उद्धार से विकास,रोजगार की उम्मीद जागी थी। लेकिन केवल 04 दिन काम चलने के बाद यकायक रुकवा देने से पानी फिर गया।
विशाल किला फिल्मकारों,पर्यटकों को लुभाता आरहा है । किले के उद्धार से पर्यटन को पंख लगना तय है। किले का उद्धार युवाओं के भविष्य को सवारने ने योग दे सकता है।
किला नरसिंहगढ़ राज घराने की संपति है। नरसिंहगढ़ को दिव्य,भव्य, और रोजगार सम्पन्न बनाने में लगे राजा-पूर्व विधायक राजवर्धन सिंह पुरातत्व विभाग के रवैये से खासे नाखुश लगते है।वे भी अनेक सवाल दागते है। जिनका उत्तर देने में शायद पुरातत्व विभाग कन्नी काटता प्रतीत होता है। बहरहाल टांग खिंचाई से बहत्तर उज्ज्वल संभावना की भूर्ण हत्या कर दी गयी।
राजा श्री सिंह का मत है कि केंद्र सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भारत भर के चुनिदा किलो का उद्धार करवा रही है। उसी योजना के तहत नरसिंहगढ़ किले को भी शामिल किया है यह मालवा के लिए बडी सौगात है।
