Y
( श्याम चौरसिया )
मप्र के पूर्व cm ,सांसद, अति वरिष्ठ नेता राजा दिग्गविजय सिह ने कांग्रेसी कुनबे को फिर आस्तीन के साँपों से सावधान रहने की चेतावनी देते हुए कहाकि ये साँप ही कांग्रेस जैसी सबसे पुरानी सेक्युलर पार्टी का बंटाधार कर रहे है। जरूरत है- सब अपनी अपनी आस्तीन में झांके। देखे। कोई साँप न छिपा हो।
राजा अक्सर अपने 10 साल cm काल को इतिहासिक बता याद करते हुए बीजेपी पर हमला बोलते है। वे कहते है। अपने 10 साला कार्यकाल में बीजेपी और कांग्रेस में कोई भेदभाव न करते हुए समान रूप से सबकी मदद की।जबकि आज? कांग्रेसी बुरी तरह प्रताड़ित है। कांग्रेसियों के धंधे रोजगार पर हमले किए जा रहे। जांच करवाई जा रही है। बेवजह बंद किया जा रहा है। फर्जी मुकदमों में फसाया जा रहा है। नतीजन अनेक कांग्रेसियों ने घनराकर बीजेपी का दामन थाम लिया।
राजा को इस बात का मलाल भी है। यदि वे भी बीजेपी की तरह भाजपाईयों को प्रताड़ित करते तो अनेक भाजपाई केशरिया तज तिरंगा थाम लेते।सुन्नत करवा लेते।
यानी साफ है। उनके 10 साला कार्यकाल में भाजपाइयों ने सब कुछ बर्दास्त किया। मगर शायद ही किसी भाजपाई ने दलबदल करके कांग्रेस को मजबूती दी हो। जबकि ज्योतिरादित्य सिंधिया, सुरेश पचौरी, तुलसी सिलावट जैसे सैकड़ो नक्षत्र,धूमकेतु कांग्रेस का तिरंगा तज केशरिया थाम बीजेपी में अपने भविष्य को उज्ज्वल बना रहे है।
यदि ज्योतिरादित्य सिंधिया राजा की तरह या कांग्रेसी रहते तो शायद वे कभी वैश्विक पहचान,प्रभाव नही बना पाते।घुटते रहते।
अनेकों कांग्रेसी श्री सिंधिया के ओजस्वी कद, प्रभाव, पकड़ को पचाने की बजाय खम्बा नोचते देखे गए।
राजा को आस्तीन में छुपे साँपो से ज्यादा खतरनाक कमल छाप कांग्रेसी लगते है। इसका उल्लेख राजा ने भी अनेक मंचो से करके कांग्रेस को कमल छाप कांग्रेसियों से मुक्ति दिलाने की हिदायत दे चुके है। मगर पिछले 20 सालों में प्रदेश अध्यक्ष पटवारी सहित किसी कांग्रेसी ने कांग्रेस को कमल छापो से मुक्ति दिलाने का प्रयास नही किया।
राजा के गृह नगर और विधान सभा क्षेत्र राघोगढ़ में कुछ कांग्रेसी मजे से सत्ता का जायका ले रहे है। राजा के काबीना मंत्री रहे विधायक पुत्र सफाई की हिम्मत दिखा देते तो उनके पुत्र की जीत का आंकड़ा 50 हजार से गोते लगा मात्र 06 हजार ओर चाचौड़ा से दमदार, चर्चित अनुज विधायक लक्ष्मण सिंह 65 हजार के करीब वोटों से एक नोसिकिया पेची की युवती से न हारते।
राजा खुद गत लोकसभा चुनाव में अपनी कर्मभूमि राजगढ़ संसदीय क्षेत्र से बिजेपी के अदने से रोडमल नागर से बुरी तरह न पीटते। इसके पहले 2019-20 में भोपाल से बीजेपी की प्रज्ञा ठाकुर से पार न पा सके थे। क्या वे इन करारी हारो की तह में भोपाल, राजगढ़,राघोगढ़, चाचौड़ा कांग्रेस में सक्रिय कमल छापो को देखते है? बढ़ते, जड़ जमाते राष्ट्रवाद को नही? या जनाधार खोती कांग्रेस की रीति, नीति,नियत ओर कारनामों को देखते है??
जब राजा जैसे शूरवीर,प्रतापी, अनुभवी,प्रभावी नेता रघोगढ़, चाचौड़ा, राजगढ़,भोपाल,गुना कांग्रेस में मौज मारते कमल छापो का इलाज नही कर सके तो प्रदेश के बाकि दिग्गजों/ धूमकेतुओं से उम्मीद करना बेमानी होगा। क्योकि वे कांग्रेस की कद्र कम पद की नेतागिरी ज्यादा करते है। बस उनका पद मजबूत होना चाहिए।
हाल में प्रदेश युवक कांग्रेस पद की बिक्री ओर वंश वाद के आरोप खुद अनेक कांग्रेसी दिग्गजों ने लगा अनेक सीनियर,भाग्यविधाता नेताओ को कटघरे में खड़ा कर दिया था।बाद में उठने वाली आवाजो को दबा असंतोष का इलाज किया गया। जबलपुर बिधायक पुत्र को प्रेदेश युवक कांग्रेस अध्यक्ष की तैनाती के बाद लगता अनेक युवाओं की आंखे खुल गयी और उन्होंने बीजेपी नेताओ से संपर्क बढ़ाना चालू कर दिया।
इसकी तह में दमन दीव,बिहार, 06 विधान सभा उपचुनावों में करारी शिकस्त मिली हार से भी इंकार नही किया जा सकता।
