( श्याम चोरसिया)
राजधानी भोपाल की सबसे बड़ी कृषि प्रधान,व्यवसायिक तहसील बैरसिया और भोपाल की कोख में बसे प्रदेश के सबसे प्रमुख धार्मिक, इतिहासिक,प्राकृतिक नगरी नरसिंहगढ के बीच की सीमा रेखा पार्वती नदी पर बने 25 साल पुराने पुल के मार्च- अप्रैल 25 में दरक जाने से विभागीय इंजीनियरो ने यातायात परिहवन रोक दिया था।
तब से ये दोनों नगर परिवहन, यातायात का भीषण तनाव झेल रहे है एवं अनिश्चितता , समय, धन की बर्बादी से दो चार होने के लिए मजबूर है।
बारिस के 04 महीनों में चार पहिया वाहन तो दूर दो पहिया वाहन से परिवहन करना टेडी खीर हो गया था। भार वाहन की आवाज तो इस 30 km रास्ते ने सुनी नही है। सबसे ज्यादा असर ग्रामीण यातायात,परिवहन पर पड़ा। ग्रामीण लोग जान हथेली पर रख पार्वती नदी की तेज धार काटने का जोखिम उठा रहे है।
बारिस थमने के बाद ग्रामीणों ने मुसीबतों को कम करने के लिए कच्चा रपटा बना दिया था। कच्चे रपटे पर ड्राइवर बस तो डाल देते है। मगर बीच नदी में महिलाओं की छोड़ बाकी यात्रियों को उतार देते है। उंन्हे पैदल नदी पार करने के लिए बाध्य करते है। जरा सा पैर फिसला तो गहरे पानी मे डूबने का जोखिम बना रहता है। लेकिन लंबा रास्ता तय करने की बजाय जोखिम उठाना पसंद करते है।
सनद रहे नरसिंहगढ से बैरसिया के बीच का 30 km का रास्ता तय करने के लिए बैरसिया से 35 km दूर भोपाल और 85 km दूर नरसिंहगढ आना जाना पड़ता है। रास्ता समय और धन साध्य बना दिया गया।
40 मिनिट के रास्ते को तय करने में अब 240 मिनिट से भी अधिक लगते है।
इतना महत्वपूर्ण पुल बन यातायात ओर परिवहन कब सुगम करेगा? सुनिश्चित बताने में न तो लोनिवि और न ब्रिज निगम बताने में समर्थ है। सूत्रों का दावा है। अभी सही डीपीआर ही नही बनी है । शायद इसी लिए नरसिंहगढ प्रवास के दौरान cm डॉक्टर मोहन यादव ने इस उपयोगी पार्वती सेतु के बारे में एक शब्द नही उगला।
सनद रहै गत बारिस के दौरान प्रदेश भर में 05 पुल ढह गए थे।
उनके भी बनने के आसार अभी तक पैदा नही किए जा सके। जबकि उनकी डीपीआई बनाई जा चुकी है। वजह विभाग के पास बजट का धोर अभाव होना बताया जाता है
यदि सामाजिक कल्याण की कुछ योजमाओ पर खजाना लुटाने की बजाय यदि मूलभूत विकास/ निर्माण योजनाओं को प्राथमिकता दी जाए तो रोजगार के द्वार खुल सकते है। व्यापार ठप्प होंने से बच सकता है ।
पार्वती नदी पर उक्त पुल के बन जाने से राजधानी भोपाल आने जाने का वैकल्पिक मार्ग खुलने से राष्टीय राज मार्ग 52 पर यातायात के दबाब को कम किया जा सकता है।