( श्याम चोरसिया )
भारतीय गैर हिंदुओं ने एक बार फिर ये साबित कर दिया कि उनकी निष्ठा भारतीय संविधान,भारत के साथ नही बल्कि युद्ध में जलते अपने ही धर्म के देश ईरान के साथ है। सांसद प्रताप गढ़ी, इमरान मसूद ओवेशी जैसे दर्जन भर से ज्यादा सांसदों पचासों विधायको, मदनी जैसे दर्जनों कथित धर्म गुरु एक स्वर में भारत को कोस भारत ही नही विश्व को गुमराह करने तुले है।
दिलचस्प। भारत का ईरान के सुलगने से कोई लेना देना नही है। ईरान को सुलगाया अमेरिका,इजराइल ने।ईरान पाकिस्तान, बंगला देश,नेपाल की तरह पड़ोसी देश भी नही है। भारत से ईरान की सीमाएं कही से नही लगती। बीच मे अफगानिस्तान, बलूचिस्तान, पाकिस्तान पड़ता है। मगर ओवेशी सहित अन्य गैर सनातनी सांसदों के भड़काऊ, जहरीले भाषणों की प्रतिक्रिया स्वरूप लखनऊ,दिल्ली, अलीगढ़ हैदराबाद, एमपी में रायसेन,भोपाल में कुछ जिहादी ईरान के समर्थन में भारत की लोक संपति को नुकसान पहुचा कर तनाव को भड़का रहे है। रायसेन में तो किले से तोप दाग ईरान के समर्थन में भारत को कोसा। आड़े हाथ लिया।
भारत- पाक या बंग्लादेश के साथ युद्ध के हालातों में तो जिहादी गैर सनातनी भारत की बजाय पाक, बांग्लादेश के समर्थन में भारत में ही बत्ती दे सकते है। भारत की पुंगी बजाने में संकोच नही करेंगे। यानी भारत को सीमा से ज्यादा भारत के अंदर ही लड़ना होगा। ये खुद गैर सनातनियो की भड़कीली, नफरती हरकतों,आचरण ने साबित कर दिया।
सनद रहे। ईरान को सुलगाने वाले अमेरिका, इजराइल है। इजराइल 50 से अधिक सालों से अपने सीमावर्ती गैर यहूदी देशों से लड़ अपने यहूदी अस्तित्व को सुरक्षित रखे हुए है। मजाल इजराइल के निवासी मुस्लिम ईरान या अन्य पड़ोसी मुल्क सीरिया,जॉर्डन, मिस्र, गाजा, फिलिस्तान की तरफदारी कर दे। वे भारतीय गैर सनातनियो के मुकाबले बहुत ज्यादा अपने देश इजराइल के प्रति वफादार है। अल अक्सा मस्जिद इजराइल की राजधानी येरूसलम में ही है। लेकिन इजराइल के मुसलमानों ने भारतीय गैर हिंदुओ की तरह मिलावती आसमानी किताब नही बल्कि असल किताब पढ़ी है। वहां भारत की तरह मदरसे नफरत, हिंसा, मारकाट की नहीं बल्कि राष्ट्र प्रेम की शिक्षा देते है। वे बताते है। जिस मिट्टी से तुम सांसे ले रहे है। जीवन जी रहे हो। जिस मिट्टी के संसाधनों का उपयोग कर रहे हो। उसके प्रति मरते दम तक वफादार रहो। और भारत मे? ठीक उलटा। भारतीय कर दाताओं से मिल रही हर प्रकार की खैरात जीमने, डकारने के बाबजूद उन्ही कर दाताओं, उन्ही भारतीय को जिहादी निशाना बनाते है। खेरातो से नवाजने वाली सरकार को ही आंखे दिखाते है। पड़ोसी मुल्क पाक- बंगलादेश के अपने ही धर्मलम्बीयो की दुर्दशा से भी सबक नही सीखते। उनके मुकाबले वे
भारत मे ज्यादा सुरक्षित, सम्मानित है। मगर इसके बाबजूद आंखों में बाल है। जो जीवन देता है। उसे कोसने की पड़ी लत कट्टरता, जिहाद, नफरत की गवाह है।
धर्म गुरु खोमेनी के अत्याचारी शासन के पतन के बाद ईरान में जश्न का माहौल है। महिलाओं, लड़कियों तक मे अपार खुशियां है। मगर भारत मे ठीक उलटा है। जैसे खोमेनी अब्बा हो। खोमेनो के डीएनए की फसल हो।
ईरान पर हमलावर अमेरिका -इजरायल है। गाजा, फिलिस्तान को नेस्तनाबूद करने वाला भी इजराइल है। सारा जगत जानता है। गाजा फिलिस्तान की सीमा से सटे दर्जन भर मुस्लिम देशों ने न तो गाजा फिलिस्तान से लुटे, पिटे नागरिकों को शरण दी न राहत सुलभ करवाई। भारत ने तो फिर भी मानवता के आधार पर राहत सामग्री भेजी। न उन मुस्लिम देशों ने गांजा, फिलिस्तान के समर्थन में इजराइल पर हमला करना तो दूर कोसा तक नही। क्यो? क्या वे उनके भाई नही थे। थे। है। लेकिन वे अराजक देश के नागरिक थे। इन्ही नागरिकों का शरण देकर डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, इंग्लैंड, इटली आदि अलगाव की आग में झुलस रहे है। वह शरण पाए गैर ईसाई संख्या बढ़ते ही हिस्सा मांगने के लिए तोड़फोड़, आगजनी करने लगे। जर्मनी,इटली ने तो गैर ईसाई धर्म स्थलों के खिलाफ सख्ती कर दी। बुरका,हिजाब बेन कर दिया। नवाज के भी नियम बना दिए। अमेरिका तो इनकी सख्ती से तलाशी लेता है। भारत की अनेक हस्तियों को पाक हस्तियों की कतार में रख दिगम्बर तक का स्वाद चखा दिया। अब अमेरिका ने इनकी दोगली हरकतों से तंग आकर इनके प्रवेश को बेन कर दिया।
ऑस्ट्रेलिया जापान ,चीन तो पहले से ही अपने अपने देशों मे घुसने नही देता। जबकि सनातनी हर देश मे मजे से आ जा रहे। घूम रहे है। उन देशों की समृद्धि के विश्वकर्मा साबित हो रहे है। सम्मान पा रहे है।
विश्व प्रसिद्ध 07 बडी कम्पनियों के co भरतीय है। यदि सनातनी दोगले,नमक हराम,बेईमान, थाली में छेद करने वाले होते तो वे co नही होते। श्री सुंदर पिचाई का वेतन तो पाक की जीडीपी का 50% से अधिक है। है न गर्व की बात। इसी राष्ट्र निष्ठा की बदौलत श्री सुनुक जी इंग्लैड के pm रहे चुके है। जबकी सनातानी केवल भारत,नेपाल में ही निवासरत है। 57 मुल्कों की तरह अभी नेपाल के सिवा कोई मुल्क नही है।भारत भी नेपाल की तरह सनातनी राष्ट्र की और तेजी से बढ़ रहा है। हालिया ईरान- अमेरिका इजराल युद्ध काल मे भारतीय गैर हिंदुओ की राष्ट्र विरोधी हरकतों, उग्र जिहादी आचरणों, से ये राह और आसान कर दी। इसने चक्षु खोल दिए। दिशा दी। समझा दिया कि असल-असल ही होता है। जिहाद करके हिस्सा वसूलने वाला कभी राष्ट्र भक्त नही हो सकता।
ईरान अपने ही धर्म वाले 11 देशों से लड़ रहा है। क्यो वे वापस में ही मार काट मचा विश्व की अर्थ व्यवस्था, शांति,अहिंसा का काल बना हुआ है? समय ये प्रश्न पूछता है। ईरान को अपनी सुरक्षा,संप्रभुता का हक है। ईरान कभी पारसियों का देश पर्सिया हुआ करता था।तलवार के जोर पर कराए गए धर्म परिवर्तन के पूजा पद्धति तो बदली जा सकती है। पर डीएनए नही। इसी दबे कुचले डीएनए की बदौलत ईरान में घर वापसी की लहर कट्टरता पर भारी पड़ रही है।
गैर सनातनी जिहादी,कट्टर कायर नही बल्कि बहादुर है तो भारत मे हिसा फैलाने, प्रदर्शन करने की बजाय ईरान जा कर लड़ना चाहिए। ईरान में पढ़ने वाले 10 हजार छात्रों की वापसी के लिए सरकार के सामने गिड़गिड़ाने,रोने की बजाय अपने उन नोनिहलो को ईरानियों के कंधे से कन्धा मिला लड़ने के मंत्र दे कर अपने धर्म का भला करना चाहिए था। नही किया। क्योकि ईरान जाकर लड़ने की हिम्मत नही है। वजह। प्रेम में निष्ठा नही दिखावा ज्यादा है। इस दिखावे पर हिंसा, जिहाद हावी है। जिस भारत का खा रहे है उसी भारत को कमजोर करने की लालसा लगती है।
यदि गाजा, फिलिस्तान,ईरान के समर्थन में न कूदते तो ये कभी बेपर्दा नही हो पाते। इनकी नापाक हरकतों ने इनके मंसूबे उजागर कर दिए। पत्ते खोल दिए।